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जी हुजूरी का पैसा मिलता है !

आधी मेहनत पे भी पूरी का पैसा मिलता है
बगल में रहते है, दुरी का पैसा मिलता  है !

वो हक़ के हक़ में बोलते हुए अच्छे नहीं लगते
जिन्हे ख़ुद जी हुजूरी का पैसा मिलता है !

खुशहाली छुपाता है !

वो हर हाल में दुनियाँ  से बदहाली छुपाता है
जिसे इज़्ज़त अज़ीज़ हो वो कंगाली छुपाता है !

मेरा अपना मेरी बरकत में नज़र को न लगा दे
अब भाई सगे भाई से खुशहाली छुपाता है !

यहाँ बस उसके इशारे पे है !

कब कौन भला किसके सहारे पे है
जीना मरना यहाँ बस उसके इशारे पे है !

वो बचाने गया जो लौटकर नहीं आया
जो शख्स डूब रहा था वो कनारे पे है !

वो अच्छा है बहुत अच्छा है !

तेरे हर झूठ पर खुश होगा जो खुद झूठा है
वो बुरा मान जायेगा जो बहुत सच्चा है !

उसे कहने दे अब के मुझ से बुरा कोई नहीं
मुझे पता है वो अच्छा है बहुत अच्छा है !

जो पहचाने से ना लगे !

सुने सुने से ना लगें, जाने जाने से ना लगे
मुझे वो शेर कहने है जो पहचाने से ना लगे !

ये तेरा अंदाज़ नहीं है !

मैं नौकरी में हूँ, मेरी कोई आवाज़ नहीं है
ये ज़बान है मेरी मगर अल्फ़ाज़ नहीं है !

तू किसी के कहे से खुद को मत बदल गुलशन
तुझे मालूम है के, ये तेरा अंदाज़ नहीं है !


किसका शौक रखता है !

हमारे बीच भला कैसे निभेगी ये महोब्बत
मैं इबादत समझता हूँ, तू इसका शौक  रखता है !

ना बन्दगी में पड़ता है ना ज़िंदगी ही जीता है
बला क्या है खुदा जाने तू किसका शौक रखता है !